Sunday, August 7, 2022

महताब

ना महताब कहेंगे ना ही कोहिनूर की आब कहेंगे, 
मगर हा इतना जरूर कहेंगे,
अब से ये चांद सितारे और फूलों की बहारें,
आप की तरह हुस्न पाने की दुआ जरूर मांगेंगे।।
©️Poet Sunil Gavaskar

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स्त्री आप भी रचनाकार हो

सृष्टि की रचयिता की तरह आप भी एक रचनाकार हो, हा जी आप स्त्री हो आप भी जीवन देने वाली एक शिल्पकार हो ।। ©️Poet Sunil Gavaskar