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Friday, October 1, 2021

स्त्री का मुस्कुराना रब के लिए अनमोल नजराना है


स्त्री का मुस्कुराना इस जहां के लिए ही नहीं बल्कि रब के लिए भी एक खूबसूरत अनमोल नजराना है।
स्त्री रब की इबादत हैं आपके ऊपर है अपनाना है या ठुकराना है ।

स्त्री सागर जैसी होती है, शांत है तो आपके लिए पालनहार बनकर डटी रहेगी,
अगर रूठी तो सुनामी बनकर आपके जीवन को तहस नहस कर देगी।

जिस तरह बच्चे की मुस्कान और बचपना आपके उलझनों को दूर कर देती है ,
उसी तरह स्त्री की मुस्कान और बचपना भी आपके जिंदगी को रंगीन कर देगी ।

स्त्री बंद शिप में मोती जैसी होती है जितनी महफूज महसूस करेगी उतनी ही अनमोल होगी ।

अपने वजूद के होने का दिखावा ना करो इनकी खुशियों की त्याग ही हमारे वजूद के होने का निशां है ।

खुशियों की तलाश ना कर स्त्री के कोख से ही खुशियां जन्म लेती है बस तू संग चलने की कोशिश कर। 

स्त्री की बचपना और मुस्कान खिलखिलाती वादियों जैसी होती है ,
बस इसी वादियों को सदैव बरकरार रखना जीवन की खुशियां सदैव गुलज़ार रहेगी।
                                 
                                  @Poet Sunil Gavaskar

Monday, August 23, 2021

किसी रोज जताएंगे

दर्द क्या होता है जतायेंगे किसी रोज़ 
कमाल की ग़ज़ल है सुनाएंगे किसी रोज़

थी उन की जिद  है कि मैं जाऊँ उन को मनाने 
मुझ को यह वहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़

कभी ऐसा होगा मैंने तो सोचा भी नहीं था 
वो इतना मेरे दिल को दुखाएंगे किसी रोज़

हर रोज़ शीशे से यही पूछता हूँ मैं 
क्या रुख पे तबस्सुम सजाएंगे किसी रोज़

अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम 
ज़ख्म-ऐ -जिगर तुमको दिखायेगें किसी रोज़

Sunday, August 15, 2021

independent day

#आप_सभी_को_स्वतंत्रता_दिवस_कि_हार्दिक_
शुभकामनाये

 रूह में बसा है यह देश,
मिट्टी का कर्ज यही निभा कर जायेंगे,
ऊँचा रहे हमारा झंडा,
तिरंगे का सम्मान करके निभाएंगे |

वतन से हमें प्यार बेशुमार,
करते है नमन हम बार - बार |

तिरंगा हमारा तीन रंगों का,
प्यार उनमे बसा बहुत सतरंगों का |

हौसला है हर देश वासियो में,
बस एक चाह है कोई नारी ना रहे दासियों में |

गर्व से हम सभी लगाते जय भारत का नारा,
यही हमारा जन्म और मरण का जयकारा |


Sunday, June 20, 2021

तकरार छोड़ो ना यार चलो मोहब्बत करते है

तकरार छोड़ो ना यार चलो 
मोहब्बत करते हैं 😊😊

कश्मीर की डल झील में हो जैसे नहाना तेरा 
मुझे देख शर्म से कसम से आंखें झुकाना तेरा 

वो ज़ालिम अदाएं देख कर हम होश में न आए
उस पानी की क्या किस्मत जिसमें आप नहाए

इतनी  खूबसूरत  झील पर चार चांँद लगाना तेरा 
मुझे  देख  शर्म  से  कसम  से आंखें झुकाना तेरा 

महकती  वादियों को देखें या आपका चेहरा देंखें
जादुई  नजारा है कशमकश में है पहले क्या देखें

सिर  से दुपट्टे को आहिस्ता आहिस्ता हटाना तेरा
मुझे  देख  शर्म  से  कसम से आंखें झुकाना तेरा 

झील में उतरना तेरा पानी का कैसे महकाना तेरा
सारी भोली मछलियों को अपने बस में लाना तेरा

ये सब नजारा देख कैसे होश में आए दिवाना तेरा 
मुझे  देख  शर्म  से कसम  से आंखें  झुकाना  तेरा 

Thursday, June 17, 2021

रंगीन - ए - झील

सनम तेरी मोहब्बत में रंगीन -ए -इश्क होना है,
तेरी आंखो के समंदर में रंगीन -ए -झील होना है।

तुझे मेरे लिए खुसबू - ए - गुलशन में रंगीन होना है,
जैसे बारिश के मौसम में गुलशन हसीन होती है।

सनम तेरी पनाहों में मुझे आमीन होना है,
जैसे ये वादिया पक्षियों के लिए हीर होती है।

सनम तेरी हसरतों के लिए मुझे जहीन होना है,
जैसे ये बादल बारिश के लिए संगीन होती है।

सनम तेरी दौलत - ए -हुस्न में मुझे शामिल होना है,
जैसे महफिलों के लिए मदिरा की जाम होती है।

सनम तेरी बाहों में मुझे आसीन होना है,
जैसे फूलों की आगोश में तितलियां साज होती है।

सनम तेरी चाहत में मनप्रीत होना है,
जैसे पपिहा को रिझाने के लिए  कोयल गीत गाती है।

सनम तेरी मोहब्बत में रंगीन -ए -इश्क होना है,
तेरी आंखो के समंदर में रंगीन - ए - झील होना  है।

Friday, June 4, 2021

ऐ मेरे करीब-ए-दिल

ऐ मेरे करीब ए दिल ..
तुमको जाना है तो बेशक जाओ,
पर मेरे दिल की तमन्ना तो सुनते जाओ।

हो सकता है तुमको हमसे ज्यादा,
कोई जहीन मिला हो ।
लेकिन अपने संग ले गए ,
ऐ मेरी उम्मीद- ए- जिंदगी 
मेरी मुस्कुराहट तो लौटाते जाओ ।

हो सकता है तेरे दिल में ,
किसी और का इश्तियाक हुआ हो ।
लेकिन तेरे साथ देखे मेरे हर ख्वाबों की ,
रंगत तो लौटाते जाओ ।

हो सकता है कोई लुटेरा मनप्रीत 
तेरे जेहन में आया हो ।
लेकिन मेरे संग किए गए ,
हर रीत तो निभाते जाओ ।

हो सकता है तेरी दुनिया में ,
किसी गंधराज का सरायत हुआ हो ।
लेकिन तेरे लिए मेरे दिल में उमड़ते, 
नजरे-ए-इनायत तो लौटाते जाओ।

हो सकता है तेरे दिल को हरने के लिए, 
किसी ने अपने लफ्जो से इरशाद किया हो ।
ऐ मेरे महबूब-ए-नजर खुदा से की गई,
मेरी हर फरियाद तो लौटाते जाओ ।

ऐ मेरे करीब ए दिल..
तुमको जाना है तो बेशक जाओ,
पर मेरे दिल की तमन्ना तो सुनते जाओ ।   

Thursday, May 27, 2021

रात की दीवार पर


रात की दीवार पर ये जो काली खामोशी है ।
जुगनुओ ने भी चुपके से कानों में  सरगोशी की है

कुछ तो साजिश की होगी इस कायनात ने जरूर
जो तूने छेड़ कर धुन सरगम की ये मदहोशी की है ।

सितारों ने इस चमकते चांद की ताजपोशी की है ।
चकोर ने तो छिप कर चांद से रूपोशी की है ।

यूं ही नहीं हम तुम्हे अपना खुदा मान बैठे हैं ।
लगे जैसे तेरे नुर की मेरी नजरो पे चश्मपोशी की है ।

Friday, May 21, 2021

ऐ मेरी जिंदगी

ऐ मेरी जिंदगी फिर से बहार आएगी,
वक़्त का इंतजार तो कर।

बेजान गुलशन में फिर से गुल खिलेंगे,
कलियों पर ऐतबार तो कर।

सूखे चितवन में फिर से बारिश होगी,
बादलों से इकरार तो कर।

जहरीली फिजाओं में फिर से महक होगी,
हवाओं से अरमान तो कर।

वीरान सी जिंदगी में फिर से महफिलें सजेंगी,
लोगो से इजहार तो कर।

ख़ामोश बरेली में फिर से मिलेंगे झुमके,
बाजारों में झनकार तो कर।

वफा से खता कर आएं तेरे गलियों में ,
बेवफा को इनकार तो कर।

फिर से चिंगारी जल उठेंगी,
पहले अग्नि से यलगार तो कर।

ऐ मेरी जिंदगी फिर से बहार आयेगी,
वक़्त का इंतजार तो कर।

Sunday, May 16, 2021

गुनाह

क्या ख़्वाबों का रंगीन होना गुनाह है 

या इंसानों का जहीन होना गुनाह है

कायरता समझते है लोग मधुरता को

क्या जुबान का शालीन होना गुनाह है 

खुद का नजर लग जाती है

क्या हसरतों का हसीन होना गुनाह है 

लोग इस्तेमाल करते है नमक की तरह

क्या आसुओं का नमकीन होना गुनाह है

दुस्मनी हो जाती है सैकड़ों से

क्या इंसान का बेहतरीन होना गुनाह है

लोग जल जाते है निहार कर जोड़ें को

क्या उनका संगीन होना गुनाह है

                             Sunil Gavaskar

                         

सच्ची लगन

सेवा तुम दर्पण तुम !
हर ख्वाब की अर्पण तुम !
खुशहाल चेहरों की अरमान तुम !
हर फरियादी की फरियाद तुम !
अपनी रैना छोड़ के 
हर नयन की सपने संजोए तुम !
अपनी खुशियां छोड़ के 
हर घर की खुशियां पिरोए तुम !
अपनी चाह को छोड़ के 
हर चाह बचाने आए तुम
लोगो के टूटते उम्मीदों में
रकीब बनकर आए हो तुम
जिंदगानी की तलाश में 
हाफिज बनकर आए हो तुम !
खुदा पूछ रहा है कौन हो तुम !
सुनील का कहना डॉक्टर और नर्स हो तुम !
इस देश की आन,बान और शान हो तुम
                              -Sunil Gavaskar

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स्त्री आप भी रचनाकार हो

सृष्टि की रचयिता की तरह आप भी एक रचनाकार हो, हा जी आप स्त्री हो आप भी जीवन देने वाली एक शिल्पकार हो ।। ©️Poet Sunil Gavaskar