Sunday, May 30, 2021
Thursday, May 27, 2021
रात की दीवार पर
रात की दीवार पर ये जो काली खामोशी है ।
जुगनुओ ने भी चुपके से कानों में सरगोशी की है
कुछ तो साजिश की होगी इस कायनात ने जरूर
जो तूने छेड़ कर धुन सरगम की ये मदहोशी की है ।
सितारों ने इस चमकते चांद की ताजपोशी की है ।
चकोर ने तो छिप कर चांद से रूपोशी की है ।
यूं ही नहीं हम तुम्हे अपना खुदा मान बैठे हैं ।
लगे जैसे तेरे नुर की मेरी नजरो पे चश्मपोशी की है ।
Friday, May 21, 2021
ऐ मेरी जिंदगी
ऐ मेरी जिंदगी फिर से बहार आएगी,
वक़्त का इंतजार तो कर।
बेजान गुलशन में फिर से गुल खिलेंगे,
कलियों पर ऐतबार तो कर।
सूखे चितवन में फिर से बारिश होगी,
बादलों से इकरार तो कर।
जहरीली फिजाओं में फिर से महक होगी,
हवाओं से अरमान तो कर।
वीरान सी जिंदगी में फिर से महफिलें सजेंगी,
लोगो से इजहार तो कर।
ख़ामोश बरेली में फिर से मिलेंगे झुमके,
बाजारों में झनकार तो कर।
वफा से खता कर आएं तेरे गलियों में ,
बेवफा को इनकार तो कर।
फिर से चिंगारी जल उठेंगी,
पहले अग्नि से यलगार तो कर।
ऐ मेरी जिंदगी फिर से बहार आयेगी,
वक़्त का इंतजार तो कर।
Wednesday, May 19, 2021
Sunday, May 16, 2021
फरिश्ता
होते इन मौतो की दौर मे
एक फरिश्ता आया हैं !
हर प्यासे गरीबों की प्यास बुझाने
एक फरिश्ता आया हैं !
हर भूखे बच्चो की आस मिटाने
एक फरिश्ता आया हैं !
हर बिलखते बहनों की साज बचाने
एक फरिश्ता आया हैं !
हर रोती मां की हर वीर लाल को बचाने
एक फरिश्ता आया है !
हर निहारती अर्धागनी की पतियों की जान बचाने
एक फरिश्ता आया है !
हर पिताओं के टूटते अरमानजगाने
एक फरिश्ता आया है !
सांसों की खोज में दर दर भटकते
हर भाई की उम्मीद जगाने एक मसीहा आया है !
धर्मो के इस जंग में हर मतभेद मिटाने
एक फरिश्ता आया है !
अंधेरे में डूबते इस देश की साख बचाने
एक फरिश्ता आया है !
हर उम्मीदों की उम्मीद जगाने
एक फरिश्ता आया है !
हर ज़र्रे ज़र्रे में एक फरिश्ता छाया हैं
हा जी कोई और नहीं फरिश्ता सोनू सुद आया है !
गुनाह
क्या ख़्वाबों का रंगीन होना गुनाह है
या इंसानों का जहीन होना गुनाह है
कायरता समझते है लोग मधुरता को
क्या जुबान का शालीन होना गुनाह है
खुद का नजर लग जाती है
क्या हसरतों का हसीन होना गुनाह है
लोग इस्तेमाल करते है नमक की तरह
क्या आसुओं का नमकीन होना गुनाह है
दुस्मनी हो जाती है सैकड़ों से
क्या इंसान का बेहतरीन होना गुनाह है
लोग जल जाते है निहार कर जोड़ें को
क्या उनका संगीन होना गुनाह है
Sunil Gavaskar
सच्ची लगन
सेवा तुम दर्पण तुम !
हर ख्वाब की अर्पण तुम !
खुशहाल चेहरों की अरमान तुम !
हर फरियादी की फरियाद तुम !
अपनी रैना छोड़ के
हर नयन की सपने संजोए तुम !
अपनी खुशियां छोड़ के
हर घर की खुशियां पिरोए तुम !
अपनी चाह को छोड़ के
हर चाह बचाने आए तुम
लोगो के टूटते उम्मीदों में
रकीब बनकर आए हो तुम
जिंदगानी की तलाश में
हाफिज बनकर आए हो तुम !
खुदा पूछ रहा है कौन हो तुम !
सुनील का कहना डॉक्टर और नर्स हो तुम !
इस देश की आन,बान और शान हो तुम
-Sunil Gavaskar
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स्त्री आप भी रचनाकार हो
सृष्टि की रचयिता की तरह आप भी एक रचनाकार हो, हा जी आप स्त्री हो आप भी जीवन देने वाली एक शिल्पकार हो ।। ©️Poet Sunil Gavaskar
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स्त्री का मुस्कुराना इस जहां के लिए ही नहीं बल्कि रब के लिए भी एक खूबसूरत अनमोल नजराना है। स्त्री रब की इबादत हैं आपके ऊपर है अपनाना है या ...