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Sunday, August 7, 2022

महताब

ना महताब कहेंगे ना ही कोहिनूर की आब कहेंगे, 
मगर हा इतना जरूर कहेंगे,
अब से ये चांद सितारे और फूलों की बहारें,
आप की तरह हुस्न पाने की दुआ जरूर मांगेंगे।।
©️Poet Sunil Gavaskar

Tuesday, August 17, 2021

शाम तू ही बता

बांहों की बगिया

बांहों में लिपटकर

निगाहें

ज़ुल्म ए सितम

बगिया

तलाश ए मेहराब

गुलाबी हुस्न

सहमा सा इश्क मेरा

मरहबा

चांद

सनम

संगदिल

सुकून

तकरार

बेपरवाह इश्क

रहनुमा

रंगीनियत

तू बन जाना राधा मेरी

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स्त्री आप भी रचनाकार हो

सृष्टि की रचयिता की तरह आप भी एक रचनाकार हो, हा जी आप स्त्री हो आप भी जीवन देने वाली एक शिल्पकार हो ।। ©️Poet Sunil Gavaskar