Monday, August 23, 2021

किसी रोज जताएंगे

दर्द क्या होता है जतायेंगे किसी रोज़ 
कमाल की ग़ज़ल है सुनाएंगे किसी रोज़

थी उन की जिद  है कि मैं जाऊँ उन को मनाने 
मुझ को यह वहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़

कभी ऐसा होगा मैंने तो सोचा भी नहीं था 
वो इतना मेरे दिल को दुखाएंगे किसी रोज़

हर रोज़ शीशे से यही पूछता हूँ मैं 
क्या रुख पे तबस्सुम सजाएंगे किसी रोज़

अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम 
ज़ख्म-ऐ -जिगर तुमको दिखायेगें किसी रोज़

Tuesday, August 17, 2021

शाम तू ही बता

देवदास

बांहों की बगिया

बांहों में लिपटकर

निगाहें

ज़ुल्म ए सितम

बगिया

तलाश ए मेहराब

गुलाबी हुस्न

सहमा सा इश्क मेरा

मरहबा

आजा की इंतजार है तेरा

चांद

सनम

संगदिल

सुकून

तकरार

बेपरवाह इश्क

रहनुमा

Priceless Gem

रंगीनियत

तू बन जाना राधा मेरी

आसमां को उल्फत

जन्नत की मलिका

मोती का हार

मुकम्मल

सुनहरी जिंदगी

शामत

संगमरमर

बेदर्द सनम

मोहब्बत की छुअन

सोहबत

Sunday, August 15, 2021

independent day

#आप_सभी_को_स्वतंत्रता_दिवस_कि_हार्दिक_
शुभकामनाये

 रूह में बसा है यह देश,
मिट्टी का कर्ज यही निभा कर जायेंगे,
ऊँचा रहे हमारा झंडा,
तिरंगे का सम्मान करके निभाएंगे |

वतन से हमें प्यार बेशुमार,
करते है नमन हम बार - बार |

तिरंगा हमारा तीन रंगों का,
प्यार उनमे बसा बहुत सतरंगों का |

हौसला है हर देश वासियो में,
बस एक चाह है कोई नारी ना रहे दासियों में |

गर्व से हम सभी लगाते जय भारत का नारा,
यही हमारा जन्म और मरण का जयकारा |


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स्त्री आप भी रचनाकार हो

सृष्टि की रचयिता की तरह आप भी एक रचनाकार हो, हा जी आप स्त्री हो आप भी जीवन देने वाली एक शिल्पकार हो ।। ©️Poet Sunil Gavaskar