दर्द क्या होता है जतायेंगे किसी रोज़
कमाल की ग़ज़ल है सुनाएंगे किसी रोज़
थी उन की जिद है कि मैं जाऊँ उन को मनाने
मुझ को यह वहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़
कभी ऐसा होगा मैंने तो सोचा भी नहीं था
वो इतना मेरे दिल को दुखाएंगे किसी रोज़
हर रोज़ शीशे से यही पूछता हूँ मैं
क्या रुख पे तबस्सुम सजाएंगे किसी रोज़
अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम
ज़ख्म-ऐ -जिगर तुमको दिखायेगें किसी रोज़
बहुत सुंदर
ReplyDeleteMast hai bilkul jhakas
ReplyDeleteअद्भुत भाई👌🙏
ReplyDeleteVery nice poetry
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