Thursday, May 27, 2021

रात की दीवार पर


रात की दीवार पर ये जो काली खामोशी है ।
जुगनुओ ने भी चुपके से कानों में  सरगोशी की है

कुछ तो साजिश की होगी इस कायनात ने जरूर
जो तूने छेड़ कर धुन सरगम की ये मदहोशी की है ।

सितारों ने इस चमकते चांद की ताजपोशी की है ।
चकोर ने तो छिप कर चांद से रूपोशी की है ।

यूं ही नहीं हम तुम्हे अपना खुदा मान बैठे हैं ।
लगे जैसे तेरे नुर की मेरी नजरो पे चश्मपोशी की है ।

29 comments:

  1. अदभुत है कविता आपकी

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  2. शानदार जबरदस्त जिंदाबाद❤️❤️❤️🥰🥰

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  3. शानदार प्रस्तुति

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  4. Well done very impressive line

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  5. Nice lines 👌👌👌💐💐

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  6. Bhai tum to kavi ho gye .....kya bat h...apna isi line main kuch kro

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  7. Thanks to everyone for your support and love🙏🙏🙏

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  8. Waah bhaiya dil choone waali poem

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  9. Keep going....never stop

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