स्त्री का मुस्कुराना इस जहां के लिए ही नहीं बल्कि रब के लिए भी एक खूबसूरत अनमोल नजराना है।
स्त्री रब की इबादत हैं आपके ऊपर है अपनाना है या ठुकराना है ।
स्त्री सागर जैसी होती है, शांत है तो आपके लिए पालनहार बनकर डटी रहेगी,
अगर रूठी तो सुनामी बनकर आपके जीवन को तहस नहस कर देगी।
जिस तरह बच्चे की मुस्कान और बचपना आपके उलझनों को दूर कर देती है ,
उसी तरह स्त्री की मुस्कान और बचपना भी आपके जिंदगी को रंगीन कर देगी ।
स्त्री बंद शिप में मोती जैसी होती है जितनी महफूज महसूस करेगी उतनी ही अनमोल होगी ।
अपने वजूद के होने का दिखावा ना करो इनकी खुशियों की त्याग ही हमारे वजूद के होने का निशां है ।
खुशियों की तलाश ना कर स्त्री के कोख से ही खुशियां जन्म लेती है बस तू संग चलने की कोशिश कर।
स्त्री की बचपना और मुस्कान खिलखिलाती वादियों जैसी होती है ,
बस इसी वादियों को सदैव बरकरार रखना जीवन की खुशियां सदैव गुलज़ार रहेगी।
@Poet Sunil Gavaskar
बेहतरीन रचना यथार्थ को दर्शाता हुआ
ReplyDeleteThis poetry is very power full
ReplyDeleteGreat poetry..
ReplyDeleteAti sundar
ReplyDeleteNice lines
ReplyDeleteKya bat kya bat kya bat 🙏🙏🙏
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteVery beautifully written... Keep writing
ReplyDelete