Sunday, June 20, 2021

तकरार छोड़ो ना यार चलो मोहब्बत करते है

तकरार छोड़ो ना यार चलो 
मोहब्बत करते हैं 😊😊

कश्मीर की डल झील में हो जैसे नहाना तेरा 
मुझे देख शर्म से कसम से आंखें झुकाना तेरा 

वो ज़ालिम अदाएं देख कर हम होश में न आए
उस पानी की क्या किस्मत जिसमें आप नहाए

इतनी  खूबसूरत  झील पर चार चांँद लगाना तेरा 
मुझे  देख  शर्म  से  कसम  से आंखें झुकाना तेरा 

महकती  वादियों को देखें या आपका चेहरा देंखें
जादुई  नजारा है कशमकश में है पहले क्या देखें

सिर  से दुपट्टे को आहिस्ता आहिस्ता हटाना तेरा
मुझे  देख  शर्म  से  कसम से आंखें झुकाना तेरा 

झील में उतरना तेरा पानी का कैसे महकाना तेरा
सारी भोली मछलियों को अपने बस में लाना तेरा

ये सब नजारा देख कैसे होश में आए दिवाना तेरा 
मुझे  देख  शर्म  से कसम  से आंखें  झुकाना  तेरा 

Thursday, June 17, 2021

ऐ दर्द ए दिल

खामोशियां तन्हाईयां

रंगीन - ए - झील

सनम तेरी मोहब्बत में रंगीन -ए -इश्क होना है,
तेरी आंखो के समंदर में रंगीन -ए -झील होना है।

तुझे मेरे लिए खुसबू - ए - गुलशन में रंगीन होना है,
जैसे बारिश के मौसम में गुलशन हसीन होती है।

सनम तेरी पनाहों में मुझे आमीन होना है,
जैसे ये वादिया पक्षियों के लिए हीर होती है।

सनम तेरी हसरतों के लिए मुझे जहीन होना है,
जैसे ये बादल बारिश के लिए संगीन होती है।

सनम तेरी दौलत - ए -हुस्न में मुझे शामिल होना है,
जैसे महफिलों के लिए मदिरा की जाम होती है।

सनम तेरी बाहों में मुझे आसीन होना है,
जैसे फूलों की आगोश में तितलियां साज होती है।

सनम तेरी चाहत में मनप्रीत होना है,
जैसे पपिहा को रिझाने के लिए  कोयल गीत गाती है।

सनम तेरी मोहब्बत में रंगीन -ए -इश्क होना है,
तेरी आंखो के समंदर में रंगीन - ए - झील होना  है।

Friday, June 4, 2021

ऐ मेरे करीब-ए-दिल

ऐ मेरे करीब ए दिल ..
तुमको जाना है तो बेशक जाओ,
पर मेरे दिल की तमन्ना तो सुनते जाओ।

हो सकता है तुमको हमसे ज्यादा,
कोई जहीन मिला हो ।
लेकिन अपने संग ले गए ,
ऐ मेरी उम्मीद- ए- जिंदगी 
मेरी मुस्कुराहट तो लौटाते जाओ ।

हो सकता है तेरे दिल में ,
किसी और का इश्तियाक हुआ हो ।
लेकिन तेरे साथ देखे मेरे हर ख्वाबों की ,
रंगत तो लौटाते जाओ ।

हो सकता है कोई लुटेरा मनप्रीत 
तेरे जेहन में आया हो ।
लेकिन मेरे संग किए गए ,
हर रीत तो निभाते जाओ ।

हो सकता है तेरी दुनिया में ,
किसी गंधराज का सरायत हुआ हो ।
लेकिन तेरे लिए मेरे दिल में उमड़ते, 
नजरे-ए-इनायत तो लौटाते जाओ।

हो सकता है तेरे दिल को हरने के लिए, 
किसी ने अपने लफ्जो से इरशाद किया हो ।
ऐ मेरे महबूब-ए-नजर खुदा से की गई,
मेरी हर फरियाद तो लौटाते जाओ ।

ऐ मेरे करीब ए दिल..
तुमको जाना है तो बेशक जाओ,
पर मेरे दिल की तमन्ना तो सुनते जाओ ।   

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स्त्री आप भी रचनाकार हो

सृष्टि की रचयिता की तरह आप भी एक रचनाकार हो, हा जी आप स्त्री हो आप भी जीवन देने वाली एक शिल्पकार हो ।। ©️Poet Sunil Gavaskar